संजीवनी साधना के प्रेरक गुरु
प्रिय आत्मीय साधक,
जीवन आत्मा की एक दिव्य यात्रा है…
जिस ईश्वर को हम बाह्य तीर्थों और धार्मिक स्थलों में खोजते हैं,
वही हमारे भीतर हमारी अंतरात्मा में निरंतर विद्यमान है…
जब मन शांत होता है, विचार थम जाते हैं
और श्वास के प्रति सजगता बढ़ती है—
तब भीतर एक दिव्य प्रकाश प्रकट होता है…
यही सच्चा आत्मबोध है।
विज्ञान से अध्यात्म की ओर
मेरे जीवन की यात्रा चिकित्सा विज्ञान से प्रारंभ हुई…
परन्तु ध्यान और साधना की निस्तब्धता में प्रवेश करते ही
यह स्पष्ट हुआ कि सच्चा उपचार केवल शरीर का नहीं—
आत्मा का होता है…
संजीवनी साधना का जन्म
यहीं से संजीवनी साधना का जन्म हुआ—
एक सरल, प्रभावशाली और वैज्ञानिक दृष्टि से समर्थ साधना
जो शरीर, मन और चेतना को संतुलन प्रदान करती है…
Divine World Mission का उद्देश्य
साधना को रहस्यमय बनाना नहीं—
उसे सरल, सहज और अनुभवजन्य रूप में
निःशुल्क साधकों तक पहुँचाना है…
गुरु केवल दिशा दिखाता है—
मार्ग पर चलना आपको स्वयं है…