पूजनीय गुरु-मंडल : दिव्य परंपरा का आलोक
Divine World Mission की चेतना उन दिव्य आत्माओं की कृपा है,
जिन्होंने अपने जीवन का प्रत्येक श्वास मानवता के कल्याण,
आत्मोद्धार और चेतना के जागरण के लिए अर्पित किया...
गुरु केवल मार्गदर्शक नहीं,
बल्कि जीवंत चेतना हैं जो साधक के भीतर सत्य का दीप प्रज्वलित करती है...
“गुरु केवल देह नहीं,
साधक के भीतर जागती हुई चेतना हैं…”
“जहाँ गुरु-कृपा है,
वहीं साधना स्वयं घटित होती है…”
महावतार बाबाजी : सनातन योग परंपरा के अनादि गुरु
महावतार बाबाजी अमर हिमालयवासी योगी और क्रिया-योग के दिव्य प्रवर्तक हैं...
बाबाजी किसी एक युग या भूगोल के नहीं
बल्कि समग्र मानव चेतना के गुरु हैं...
उनकी कृपा से पूज्य गुरुजी को
श्रीविद्या की परम दिव्य दीक्षा प्राप्त हुई...
भगवान नित्यानंद बाबा जी
गणेशपुरी के भगवान नित्यानंद बाबा
करुणा, मौन और शक्ति के प्रतीक थे...
उनसे पूज्य गुरुजी को
संजीवनी साधना की दीक्षा प्राप्त हुई...
स्वामी जी महाराज
दतिया पीठ के पूज्य स्वामी जी महाराज
माँ पीतांबरा के परमहंस भक्त थे...
उनसे पूज्य गुरुजी को
माँ पीतांबरा की अद्वैत दीक्षा प्राप्त हुई...
गुरु-कृपा : हमारे मिशन का आधार
इन तीनों दिव्य गुरुओं की कृपा ही
Divine World Mission का मूल आधार है....
हमारा प्रण है कि हम उनके दिखाए पथ पर चलते हुए
मानवता में चेतना, करुणा और सत्य की ज्योति
को निरंतर प्रज्वलित करते रहें...